Surya Grahan 2026 timing in india: आज इतने बजे से लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें सूतक काल की टाइमिंग और पूरी जानकारी
आज लगेगा साल का पहला 'रिंग ऑफ फायर' सूर्य ग्रहण! दोपहर 3:26 बजे शुरू, सूतक काल और भारत में दिखेगा या नहीं? पूरी डिटेल
नमस्कार दोस्तों! आज 17 फरवरी 2026 है, और आसमान में एक खास खगोलीय घटना होने वाली है – साल का पहला सूर्य ग्रहण! ये ग्रहण वलयाकार (Annular Solar Eclipse) है, जिसे अंग्रेजी में "रिंग ऑफ फायर" भी कहते हैं। मतलब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाएगा, बल्कि सूर्य के चारों तरफ एक चमकदार छल्ला (रिंग) दिखेगा – बहुत ही खूबसूरत नजारा!
लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है – क्या भारत में दिखेगा? अफसोस की बात है कि नहीं, भारत में ये सूर्य ग्रहण कहीं भी दिखाई नहीं देगा। ये मुख्य रूप से दक्षिणी गोलार्ध में दिखेगा – जैसे अंटार्कटिका, चिली, अर्जेंटीना, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, नामीबिया, मॉरीशस, बोत्सवाना और मोजाम्बिक जैसे इलाकों में। भारत, नेपाल, श्रीलंका, UAE, म्यांमार आदि एशियाई देशों में सूर्य नीचे होने की वजह से ये ग्रहण बिल्कुल नजर नहीं आएगा।
फिर भी, ज्योतिष और पंचांग के हिसाब से इसका समय और प्रभाव जानना जरूरी है, खासकर पटना जैसे शहरों में जहां लोग धार्मिक मान्यताओं को बहुत महत्व देते हैं।
सूर्य ग्रहण की टाइमिंग (भारतीय समयानुसार - IST)
- ग्रहण की शुरुआत (स्पर्श/Partial Phase Start): दोपहर 3:26 बजे
- ग्रहण का चरम/पीक (Maximum Annularity): शाम 5:41-5:42 बजे के आसपास (कुछ जगहों पर 5:13 से 6:11 के बीच पीक फेज)
- ग्रहण की समाप्ति (मोक्ष/End): शाम 7:57 बजे (कुछ स्रोतों में 7:58 तक)
- कुल अवधि: लगभग 4 घंटे 31-32 मिनट
ये समय पूरे भारत में एक जैसा रहेगा, क्योंकि ये UTC से कन्वर्ट किया गया IST है।
सूतक काल की टाइमिंग और नियम
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है। मतलब अगर ग्रहण 3:26 PM से शुरू हो रहा है, तो सूतक सुबह 3:26 AM से शुरू हो जाता। लेकिन अच्छी खबर ये है कि भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा!
क्यों? क्योंकि ग्रहण दिखाई नहीं दे रहा है। हिंदू परंपरा और ज्यादातर पंडितों के अनुसार, जहां ग्रहण नजर नहीं आता, वहां सूतक, ग्रहण के नियम, खाना-पीना बंद करना आदि लागू नहीं होते। तो आज आप नॉर्मल दिन की तरह पूजा-पाठ, खाना-खाना, काम-धाम सब कर सकते हैं – कोई पाबंदी नहीं!
ग्रहण का प्रकार और महत्व
ये फाल्गुन अमावस्या पर पड़ रहा है, कुंभ राशि में और धनिष्ठा नक्षत्र में। ज्योतिष के मुताबिक कुंभ राशि वाले, या जिनकी कुंडली में कुंभ मजबूत है, उन पर थोड़ा प्रभाव पड़ सकता है – जैसे मानसिक तनाव, फैसले लेने में दिक्कत। लेकिन चूंकि दिखाई नहीं दे रहा, प्रभाव भी कम माना जाता है।
ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें (सामान्य सलाह)
भले सूतक न हो, लेकिन अगर आप सावधानी बरतना चाहें तो:
- बाहर निकलते समय सूर्य की तरफ सीधे न देखें (वैसे भी दिखेगा नहीं)।
- गर्भवती महिलाएं ज्यादा सावधान रहें।
- घर में तुलसी का पौधा रखें, हनुमान चालीसा पढ़ें।
- ग्रहण के बाद स्नान करके नए कपड़े पहन सकते हैं।
दोस्तों, ये ग्रहण खगोल विज्ञान के लिए बहुत खास है – "रिंग ऑफ फायर" का नजारा दुनिया के कुछ हिस्सों में लाखों लोग देखेंगे। भारत में अगला ग्रहण 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण के रूप में दिखेगा, वो होली से ठीक पहले!
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