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छठ पूजा में खरना क्यों होता है Why is Kharna observed during Chhath Puja?

छठ पूजा में खरना का विशेष महत्व है। खरना छठ पूजा के दूसरे दिन मनाया जाता है, जो कार्तिक मास की शुक्ल पंचमी तिथि को होता है। यह छठ व्रत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें व्रती (व्रत रखने वाले) और उनके परिवार के लिए कुछ खास अनुष्ठान किए जाते हैं। खरना के पीछे धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक कारण हैं। आइए समझते हैं कि खरना क्यों होता है: 1. व्रत की तैयारी और शुद्धिकरण खरना का दिन व्रत की कठिन प्रक्रिया के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होने का प्रतीक है। इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखते हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद विशेष प्रसाद (खीर, रोटी, और गुड़ से बनी रस्सी) ग्रहण करते हैं। यह प्रसाद बहुत ही सात्विक और सादा होता है, जो शरीर को शुद्ध करता है और अगले दो दिनों के कठिन निर्जला व्रत के लिए ऊर्जा प्रदान करता है। खरना का उपवास और प्रसाद ग्रहण करना व्रती के आत्मसंयम, समर्पण और शुद्धता को दर्शाता है। 2. छठी मइया और सूर्यदेव के प्रति समर्पण खरना का प्रसाद छठी मइया (षष्ठी देवी) और सूर्यदेव को अर्पित किया जाता है। यह अनुष्ठान छठी मइया के प्रति श्रद्धा और विश्वास को दर्शाता है, जो संतान की र...

Chhath Puja 2024: छठ पूजा का इतिहास जानें कैसे हुई छठ पूजा की शुरुआत

छठ पूजा भारत के पूर्वी हिस्सों, विशेषकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला एक प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार विशेष रूप से सूर्य देवता और छठी मैया की उपासना के लिए प्रसिद्ध है। छठ पूजा का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, और इसकी शुरुआत के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। छठ पूजा का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व छठ पूजा की शुरुआत को लेकर दो मुख्य कथाएं प्रचलित हैं - एक पौराणिक और दूसरी महाभारत से जुड़ी ऐतिहासिक कथा। 1. पौराणिक कथा: छठी मैया की पूजा छठ पूजा में छठी मैया की उपासना की जाती है, जिन्हें सूर्य देव की बहन माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, छठी मैया संतानों और परिवार की रक्षा करती हैं और व्रत करने वाले की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। इसे प्रकृति के साथ एक गहरा संबंध माना जाता है और इसी कारण सूर्य देवता को धन्यवाद अर्पित करने के लिए यह पूजा की जाती है। 2. महाभारत से जुड़ी कथा: कुंती और कर्ण की कहानी महाभारत में सूर्य पुत्र कर्ण का उल्लेख है, जो भगवान सूर्य के परम भक्त थे। वे प्रतिदिन घंटों तक जल में खड़े होकर सूर्य की उपासना करते थे।...