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मई, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Bride Falls with Chair During Blessings शादी के स्टेज पर हादसा: आशीर्वाद के बीच कुर्सी सहित नीचे गिरी दुल्हन

शादी के स्टेज पर हादसा: आशीर्वाद के बीच कुर्सी सहित नीचे गिरी दुल्हन शादी का दिन हर किसी के लिए बेहद खास होता है। महीनों की तैयारियों, सपनों और उम्मीदों के साथ लोग इस दिन को यादगार बनाना चाहते हैं। लेकिन कई बार, सारी सावधानियों के बावजूद कुछ ऐसा हो जाता है, जो किसी ने सोचा भी नहीं होता। ऐसा ही एक हैरान करने वाला वाकया हाल ही में एक शादी समारोह के दौरान सामने आया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना उस समय की है, जब स्टेज पर दूल्हा-दुल्हन जयमाल की रस्म के बाद आशीर्वाद ले रहे थे। चारों तरफ रिश्तेदारों और मेहमानों की भीड़ थी, जो नवविवाहित जोड़े को祝福 दे रहे थे। माहौल खुशनुमा था, हंसी-मजाक चल रहा था और हर कोई इस पल को अपने कैमरे में कैद करने में व्यस्त था। लेकिन तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिसने सभी को चौंका दिया। दुल्हन, जो जयमाल के बाद कुर्सी पर बैठी थी, दूल्हे के दोस्तों के मस्ती भरे हंगामे के बीच अचानक संतुलन खो बैठी। दरअसल, दूल्हे के दोस्त मस्ती के मूड में थे और स्टेज पर कुछ ज्यादा ही उत्साह दिखा रहे थे। इसी दौरान किसी ने मजाक में कुर्सी को हल्का सा धक्का दे दिया, ज...

Operation Sindoor and the India-Pakistan Conflict ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान संघर्ष: एक राष्ट्र की दृढ़ता की कहानी

Operation Sindoor and the India-Pakistan Conflict ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान संघर्ष: एक राष्ट्र की दृढ़ता की कहानी साल 2025 के मई महीने में, जब देश गर्मी की चपेट में था और लोग आम चुनावों की सरगर्मियों में डूबे हुए थे, तभी एक ख़बर ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा — “ ऑपरेशन सिंदूर।” यह सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं था, बल्कि एक ऐसा कदम था जिसने भारत की सुरक्षा नीति, राजनीतिक इच्छाशक्ति और आम नागरिकों की उम्मीदों का एक नया चेहरा पेश किया। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर था क्या? क्यों यह अचानक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में छा गया? और इसके चलते भारत और पाकिस्तान के बीच जो टकराव हुआ, वह किस हद तक गंभीर था? इन सभी सवालों के जवाब हम इस लेख में विस्तार से समझेंगे। ऑपरेशन सिंदूर: नाम से लेकर नतीजों तक " सिंदूर" भारतीय संस्कृति में स्त्री सम्मान, वैवाहिक विश्वास और गरिमा का प्रतीक है। जब इस नाम से एक सैन्य कार्रवाई की घोषणा हुई, तो स्पष्ट था कि मामला संवेदनशील और भावनात्मक दोनों था। दरअसल, यह ऑपरेशन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर ( PoK) में सक्रिय उन आतंकी ठिकानों के खिलाफ था, जो लंबे सम...

7 मई की मॉक ड्रिल: प्रमुख सुरक्षा उपाय और उनकी महत्ता

 में 7 मई 2025 को देशभर के 244 चिह्नित नागरिक सुरक्षा जिलों में एक व्यापक सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। यह अभ्यास जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के मद्देनजर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह मॉक ड्रिल युद्ध या आपातकालीन स्थिति जैसे हवाई हमले, मिसाइल हमले या अन्य संकटों से निपटने की तैयारियों को परखने और नागरिकों को प्रशिक्षित करने के लिए आयोजित की जा रही है। इस लेख में हम इस मॉक ड्रिल के दौरान अपनाए जाने वाले प्रमुख सुरक्षा उपायों और उनकी भूमिका पर चर्चा करेंगे। मॉक ड्रिल का उद्देश्य मॉक ड्रिल एक ऐसा अभ्यास है जो वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों की नकल करता है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों, प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं को संकट के समय त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना है। यह अभ्यास न केवल सरकारी तंत्र की तत्परता का आकलन करता है, बल्कि आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने और घबराहट को कम करने में भी मदद करता है। 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद यह पहली बार है जब इत...

रामकेवल की कहानी: जहां जज़्बा हो, वहां रास्ते खुद बन जाते हैं

जब भी हम सफलता की कहानियों की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे ज़ेहन में बड़े शहरों की तस्वीरें, नामचीन स्कूलों के छात्र और अंग्रेज़ी बोलते युवा उभरते हैं। मगर असली प्रेरणा तो वहां से आती है, जहां संसाधन नहीं, सिर्फ संघर्ष होता है। बाराबंकी जिले के एक छोटे से गांव निजामपुर में रहने वाले रामकेवल की कहानी कुछ ऐसी ही है। निजामपुर, जो अहमदपुर गांव का हिस्सा है, महज़ 40 घरों और दो सौ लोगों की आबादी वाला एक छोटा सा दलित बस्ती है। यहां के लोग खेती-बाड़ी और दिहाड़ी मज़दूरी से अपना पेट पालते हैं। ऐसे गांव में जहां आज़ादी के बाद से अब तक किसी ने हाई स्कूल पास नहीं किया था, वहीं से एक लड़के ने इतिहास रच दिया—नाम है रामकेवल। रामकेवल का जीवन कोई आम जीवन नहीं है। वह रात भर शादियों में लाइट्स ढोता था, सिर पर भारी-भरकम बिजली की मशीनें रखकर बारातों में रोशनी करता था, ताकि कुछ पैसे जुटा सके। लेकिन जैसे ही रात बीतती, अगली सुबह बिना थके, बिना रुके, स्कूल पहुँच जाता था। थकावट नहीं थी उसके इरादों में, क्योंकि सपने भारी थे—और उन्हें पूरा करना ही था। हाई स्कूल पास करने वाला वह अपने गांव का पहला छात्र बना। और यही ...